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Tuesday, 4 June 2013

हमारी संस्कृत भाषा के बारे में सनातन सच..!!


संस्कृत



1. दवा के लिए सबसे उपयोगी भाषा अर्थात संस्कृत में बात करने से व्यक्ति... स्वस्थ और बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे रोग से मुक्त हो जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश(Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है।संदर्भ: अमेरीकन हिन्दू यूनिवर्सिटी (शोध के बाद).
 
2. सबसे अच्छे प्रकार का कैलेंडर जो इस्तेमाल किया जा रहा है, हिंदू कैलेंडर है (जिसमें नया साल सौर प्रणाली के भूवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ शुरू होता है) संदर्भ: जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी.

3. संस्कृत की सर्वाधिक शुद्धता के कारण यह कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा हे  (फ़ोर्ब्स पत्रिका जुलाई 1987 की एक रिपोर्ट में)।

Saturday, 1 June 2013

सबसे पहले बैटरी महर्षि अगस्त ने बनाई थी

बैटरी


बैटरी सबसे पहले भारत मे बनी | बैटरी बनाने की जो विधि है जो आधुनिक विज्ञानं ने भी स्वीकार कर रखी है वो महर्षि अगस्त द्वारा दी गयी विधि है | महर्षि अगस्त ने सबसे पहले बैटरी बनाई थी और उसका विस्तार से वर्णन है अगस्त संहिता मे | पूरा बैटरी बनाने की विधि या तकनीक उन्होंने दिया है और कई लोगोने बनाके भी देखा है, और ये तकनीक हजारो वर्ष पहले की है |

माने जो सभ्यता बैटरी बनाना जानते हो वो विद्युत् के बारे मे भी जानते होंगे क्योंकि बैटरी येही करता है, कर्रेंट के फ्लो के लिए हि हम उसका उपयोग करते है| ये अलग बात है के वो डायरेक्ट कर्रेंट है और आज की दुनिया मे हम जो उपयोग करते है वो अल्टरनेटिव करेंट है; लेकिन डायरेक्ट कर्रेंट का सबसे पहले जानकारी दुनिया को हुई तो वो भारत मे महर्षि अगस्त को हि है |

Sunday, 26 May 2013

गर्भ निरोधक गोलिया

गर्भ निरोधक

मित्रो कई विदेशी कंपनियाँ हमारे देश की माताओ ,बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं !(Contraceptive)
कुछ तो गोलियों (pills) के रूप मे बेचे जाते हैं ! और इसके इलवा इनके अलग अलग नाम हैं !
जैसे norplant,depo provera, I pill है एक E pill है ! ऐसे करके कुछ और अलग अलग नामो से हमारे देश की माताओ ,बहनो को ये Contraceptive बेचे जाते है !

और आपको ये जानकर बहुत दुख होगा जिन देशो की ये कंपनियाँ है ! ये सब वो अपने देश की माताओं बहनो को नहीं बेचती है ! लेकिन गर्भ निरोधक गोलियों को भारत मे लाकर बेच रही हैं !

जैसे ये depo provera नाम की तकनीक इनहोने विकसित की है गर्भ निरोधक के लिए !! ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम है आबजोन ! इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने ban किया हुआ है की ये depo provera नाम की तकनीक को अमेरिका मे नहीं बेच सकती ! तो कंपनी ने वहाँ नहीं बेचा ! और अब ये गर्भ निरोधक उत्पादन कर भारत ले आए और भारत सरकार से इनहोने agreement कर लिया और अब ये धड़ले ले भारत मे बेच रहे हैं !

ये गर्भ निरोधक injection के रूप मे भारत की माताओ बहनो को दिया जा रहा है और भारत के बड़े बड़े अस्पतालो के डाक्टर इस injection को माताओं बहनो को लगवा रहें है ! परिणाम क्या हो रहा है ! ये माताओ ,बहनो का जो महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है और उनके अंत उनके uterus मे cancer कर देता है ! और माताओ बहनो की मौत हो जाती है !

कई बार उन माताओं ,बहनो को पता ही नहीं चलता की वो किसी डाक्टर के पास गए थे और डाक्टर ने उनको बताया नहीं और depo provera का injection लगा दिया ! जिससे उनको cancer हो गया और उनकी मौत हो गई !! पता नहीं लाखो माताओ ,बहनो को ये गर्भ निरोधक लगा दिया गया और उनकी ये हालत हो गई !

इसी तरह इनहोने एक NET EN नाम की गर्भ निरोधक के लिए तकनीकी लायी है ! steroids के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी injection के रूप मे भी दिया जाता है ! इससे उनको गर्भपात हो जाता है ! और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है !! और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है !

Tuesday, 21 May 2013

आयुर्वेद के अनुसार भोजन


आयुर्वेद के आनुसार भोजन

मित्रो आप आयुर्वेद के  नियमो का पालण पूरी ईमानदारी से अपने भोजन मे करे !!
आयुर्वेद के ये नियमो का पालण न करने से कई बीमारियाँ ज़िंदगी मे आती हैं !!

सुबह उठते ही आयुर्वेद के अनुसार  सबसे पहले हल्का गर्म पानी पिये !! 2 से 3 गिलास जो रोज पिये !
पानी हमेशा बैठ कर पिये ! पानी हमेशा घूट घूट करके पिये !!

घूट घूट कर इसलिए पीना है ! ताकि सुबह की जो मुंह की लार है इसमे ओषधिए गुण बहुत है ! ये लार पेट मे जानी चाहिए ! वो तभी संभव है जब आप पानी बिलकुल घूट घूट कर मुंह मे घूमा कर पिएंगे !

इसके बाद दूसरा काम पेट साफ करने का है ! रोज पानी पीकर सुबह शोचालय जरूर जाये ! सुबह पानी शोचलाय जाने से पहले ही पीना है !
!पेट का सही ढंग से साफ न होना 108 बीमारियो की जड़ है !

Wednesday, 15 May 2013

आयुर्वेद के अनुसार कब और कितना भोजन खाना चाहिए


आयुर्वेद के अनुसार भोजन 
              मित्रो आज में आप को बताऊंगा आयुर्वेद के अनुसार कब और कितना भोजन खाना चाहिए . हमारे देश मे 3000 साल पहले एक ऋषि हुए जिनका नाम था बागवट जी ! वो 135 साल तक जीवित रहे ! उन्होने अपनी पुस्तक अशटांग हिरद्यम मे स्वस्थ्य रहने के 7000 सूत्र लिखे ! उनमे से ये एक सूत्र राजीव दीक्षित जी की कलम से आप पढ़ें !


बागवट जी कहते है, ये बहुत गहरी बात वो ये कहते है जब आप भोजन करे कभी भी तो भोजन का समय थोडा निश्चित करें । भोजन का समय निश्चित करें । ऐसा नहीं की कभी भी कुछ भी खा लिया । हमारा ये जो शरीर है वो कभी भी कुछ खाने के लिए नही है । इस शरीर मे जठर है, उससे अग्नि प्रदिप्त होती है । तो बागवटजी कहते है की, जठर मे जब अग्नी सबसे ज्यादा तीव्र हो उसी समय भोजन करे तो आपका खाया हुआ, एक एक अन्न का हिस्सा पाचन मे जाएगा और रस मे बदलेगा और इस रस में से मांस,मज्जा,रक्त,मल,मूत्रा,मेद और आपकी अस्थियाँ इनका विकास होगा ।